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Chhat pooha special

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Chhat pooha special

C
CyberBenz

13 Views • Oct 30, 2022

Description

इसी तरह रूद्रधर की एक रचना 15 वीं शताब्दी की है, जिसका नाम है- ’वर्षकृत्य’ इसमें भी छट पर्व पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। इसमें वह चार दिनों के पर्व की चर्चा करते है। कहते है कि षष्ठी के दिन निराहार रहकर शाम में नदी तट पर भगवान सूर्य को जलार्पित करना चाहिए। सुर्य की आराधना के बाद रात्रि में जागरण करें पुनः सुबह में सुर्य की आराधना करें वह उसी विधान की चर्चा करते है जो आाज भी विद्यामान है। गड़वाल के राज गोविंद अग्रवाल के सेनापति लक्ष्मीधर की पुस्तक ‘कल्पतरू’ में 1130 ई0 के आसपास सूर्योपासना की चर्चा है । हेमाद्रि ने 1280 ई0 मे भगवान भस्कर के लिए जिस प्रसाद की चर्चा की है। उसके निर्माण की विधि वही है। जैसे आजकल कसार बनता है। वाण्भट्ट के रिस्तेदार मयुरभट्ट ने भी ’सूर्यांसत्त’ पुंस्तक में सूर्याेपासना की चर्चा की है।