सब जानते हुए भी फँस जाती हूँ, मुक्त कैसे रहूँ? || आचार्य प्रशांत (2023)
प्रसंग:
~ सब जानते हुए भी फँस जाती हूँ, मुक्त कैसे रहूँ?
~ मन में भाव तो आते ही हैं, तो उनसे लिप्त हुए बिना कैसे रहा जाए?
~ त्याग किसके लिए करना है?
~ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बंधनों से कैसे मुक्त रहा जाए?
संगीत: मिलिंद दाते
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