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swm news...जांच की नई तकनीक से काबू में मलेरिया, साल-दर-साल घट रहे मरीज
Description
सवाईमाधोपुर. पिछले कुछ सालों में जिले ने मच्छरजनित बीमारी मलेरिया पर काफी हद तक काबू पाया है। पानी जनित क्षेत्र होने एवं बहुतायत संख्या में तालाब होने के बावजूद यहां मच्छरों की संख्या कम है। इसका कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार इस दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं, जिसके चलते यहां साल-दर-साल मलेरिया के मरीज घटे हैं।
90 से अधिक तालाब में छोड़ी गई गम्बूसिया
जिले में बीते कुछ सालों से मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नया तोड़ निकाला है। लार्वा को खत्म करने के लिए जिले के 90 से अधिक तालाबों में गम्बूशियां मछलिया डाली गई है। ये मछलिया एनाफ्लीज मादा मच्छर को पैदा करने वाले लार्वा को खाती है। इससे लार्वा नहीं पनपता है। जिले में विशेषकर भवगतगढ़, खण्डार, बौंली, मलारना डूंगर सहित कई उपखंडो में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जलाशयों में गम्बूशियां डाली है। इससे लार्वा का खात्मा हुआ है।
साढ़े पांच साल में केवल 7 ही केस
जांच की नई तकनीक व लोगों में जागरूकता आने से अब धीरे-धीरे जिले में मलेरियां के रोगियों की संख्या घटने लगी है। जिले में बीते साढ़े पांच साल में मलेरिया के केवल 20 ही पॉजीटिव केस आए है जबकि अब तक किसी भी रोगी की मौत नहीं हुई है।
यूं फैलता है मलेरिया, यह हैं लक्षण
जानकारी अनुसार मलेरिया एक प्रमुख वेक्टरजनित बीमारी है। यह संक्रमित मच्छरों की एक प्रजाति मादा एनीफिलीज मच्छर के काटने से होती है। संक्रमण के बाद मलेरिया के लक्षण आमतौर पर 10 दिन से चार सप्ताह में विकसित हो सकते हैं। मलेरिया के सामान्य लक्षण सिरदर्द, तेज बुखार, पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, जी मिचलाना और खांसी आदि हैं। इसके विशेष लक्षणों में अधिक ठंड लगने से कंपकंपी, छाती और पेट में तेज दर्द होना व शरीर में ऐंठन होना है।
सजग रहें, सफाई का रखें ध्यान
मौसम मेे बदलाव व मच्छरजनित बीमारियों से आमजन को सजग रहने की जरूरत है। शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनने के साथ रात के समय बिस्तर पर मच्छरदानी का प्रयोग करें। मच्छररोधी कीटनाशी का छिडक़ाव भी किया जा सकता है। मच्छरों से मलेरिया के अलावा डेंगू, चिकनगुनिया आदि बीमारियां फैलती हैं। इनसे बचाव के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। घरों व आसपास क्षेत्र में जमा पानी में ही मच्छरों के लार्वा पैदा होते हैं। घर में पड़े कबाड़ में जमा पानी, गमलों व मटकों के नीचे रखे बर्तन में पड़े पानी, कूलर व फ्रिज की ट्रे में जमा पानी को खाली करने के साथ पक्षियों के परिडें में पानी जमा नहीं रहने देना चाहिए। वहीं पानी की टंकियों को भी ढककर रखा जाना चाहिए। बुखार या अन्य कोई लक्षण दिखाई देने पर भयभीत न होकर चिकित्सीय सलाह लें।
यूं घट रहे है मलेरिया के केस...
वर्ष पॉजिटिव केस
2020 2
2021 5
2023 0
2024 0
2025 अब तक एक भी नहीं
इनका कहना है...
विश्व मलेरिया दिवस को लेकर उपखंड के मुख्य चिकित्साधिकारियों को जनसमुदाय को जागरूक करने के लिए पोस्टर, नारा लेखन, पंपलेट बांटने आदि गतिविधियां कराने के निर्देश दिए है। सभी को हाईरिस्क क्षेत्रों में मच्छर रोधी गतिविधियां करवाकर रिपोर्ट भिजवाने के निर्देश दिए है।
डॉ. अनिल कुमार जैमिनी, सीएमएचओ, सवाईमाधोपुर
90 से अधिक तालाब में छोड़ी गई गम्बूसिया
जिले में बीते कुछ सालों से मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नया तोड़ निकाला है। लार्वा को खत्म करने के लिए जिले के 90 से अधिक तालाबों में गम्बूशियां मछलिया डाली गई है। ये मछलिया एनाफ्लीज मादा मच्छर को पैदा करने वाले लार्वा को खाती है। इससे लार्वा नहीं पनपता है। जिले में विशेषकर भवगतगढ़, खण्डार, बौंली, मलारना डूंगर सहित कई उपखंडो में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जलाशयों में गम्बूशियां डाली है। इससे लार्वा का खात्मा हुआ है।
साढ़े पांच साल में केवल 7 ही केस
जांच की नई तकनीक व लोगों में जागरूकता आने से अब धीरे-धीरे जिले में मलेरियां के रोगियों की संख्या घटने लगी है। जिले में बीते साढ़े पांच साल में मलेरिया के केवल 20 ही पॉजीटिव केस आए है जबकि अब तक किसी भी रोगी की मौत नहीं हुई है।
यूं फैलता है मलेरिया, यह हैं लक्षण
जानकारी अनुसार मलेरिया एक प्रमुख वेक्टरजनित बीमारी है। यह संक्रमित मच्छरों की एक प्रजाति मादा एनीफिलीज मच्छर के काटने से होती है। संक्रमण के बाद मलेरिया के लक्षण आमतौर पर 10 दिन से चार सप्ताह में विकसित हो सकते हैं। मलेरिया के सामान्य लक्षण सिरदर्द, तेज बुखार, पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, जी मिचलाना और खांसी आदि हैं। इसके विशेष लक्षणों में अधिक ठंड लगने से कंपकंपी, छाती और पेट में तेज दर्द होना व शरीर में ऐंठन होना है।
सजग रहें, सफाई का रखें ध्यान
मौसम मेे बदलाव व मच्छरजनित बीमारियों से आमजन को सजग रहने की जरूरत है। शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनने के साथ रात के समय बिस्तर पर मच्छरदानी का प्रयोग करें। मच्छररोधी कीटनाशी का छिडक़ाव भी किया जा सकता है। मच्छरों से मलेरिया के अलावा डेंगू, चिकनगुनिया आदि बीमारियां फैलती हैं। इनसे बचाव के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। घरों व आसपास क्षेत्र में जमा पानी में ही मच्छरों के लार्वा पैदा होते हैं। घर में पड़े कबाड़ में जमा पानी, गमलों व मटकों के नीचे रखे बर्तन में पड़े पानी, कूलर व फ्रिज की ट्रे में जमा पानी को खाली करने के साथ पक्षियों के परिडें में पानी जमा नहीं रहने देना चाहिए। वहीं पानी की टंकियों को भी ढककर रखा जाना चाहिए। बुखार या अन्य कोई लक्षण दिखाई देने पर भयभीत न होकर चिकित्सीय सलाह लें।
यूं घट रहे है मलेरिया के केस...
वर्ष पॉजिटिव केस
2020 2
2021 5
2023 0
2024 0
2025 अब तक एक भी नहीं
इनका कहना है...
विश्व मलेरिया दिवस को लेकर उपखंड के मुख्य चिकित्साधिकारियों को जनसमुदाय को जागरूक करने के लिए पोस्टर, नारा लेखन, पंपलेट बांटने आदि गतिविधियां कराने के निर्देश दिए है। सभी को हाईरिस्क क्षेत्रों में मच्छर रोधी गतिविधियां करवाकर रिपोर्ट भिजवाने के निर्देश दिए है।
डॉ. अनिल कुमार जैमिनी, सीएमएचओ, सवाईमाधोपुर
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