Hosted by Dailymotion. For legal issues report at the Copyright Center, report us on DMC, or use the Instant Removal tool.
VID-20250201-WA0001
Description
विषयान् ध्यायतश्र्चित्तं विषयेषु विषज्जते।
मामनुस्मरतश्र्चित्तं मय्येव प्रविलीयते।।
( भाग.११-१४-२७ )
तुमने अब तक संसार में जहाँ बार-बार चिन्तन किया उसका फल भोगा।एक बार मुझमें आनन्द है ये चिन्तन बार-बार कर के देख लो तो मैं मिल जाऊँ,और कुछ करना ही नहीं है।चिन्तन,मनन,स्मरण, बस।
*- जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज*
मामनुस्मरतश्र्चित्तं मय्येव प्रविलीयते।।
( भाग.११-१४-२७ )
तुमने अब तक संसार में जहाँ बार-बार चिन्तन किया उसका फल भोगा।एक बार मुझमें आनन्द है ये चिन्तन बार-बार कर के देख लो तो मैं मिल जाऊँ,और कुछ करना ही नहीं है।चिन्तन,मनन,स्मरण, बस।
*- जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज*