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Sema-Khamnore

P
Patrika

434 Views • Aug 04, 2020

Description

कोरोना काल में नजर आई मानवता
सेमा ग्राम पंचायत
- जिला – राजसमंद
- ब्लाक - खमनोर

गिरीश पालीवाल
खमनोर। कोरोना संकट के दौरान हाथ बढ़ाकर मानवता के लिए प्रयासों की यह कहानी राजसमंद जिले के खमनोर ब्लाक की सेमा ग्राम पंचायत की है। सेमा पंचायत में तीन राजस्व गांव हैं और साढ़े छह हजार की आबादी निवास करती है। गांव के सैंकड़ों लोग गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य राज्यों के बड़े शहरों में व्यवसाय और नौकरी करते हैं। कोरोना संक्रमण से हुए लाॅकडाउन के बाद से ही इन शहरों से प्रवासियों के लौटने का सिलसिला चल रहा है।
ग्राम पंचायत व स्थानीय प्रशासन ने सभी लोगों को संस्थागत व होम क्वारंटीन करवाने में मदद की। संस्थागत क्वारंटीन सेंटर पर प्रवासियों को भामाशाहों की मदद से खाने-पीने, ठहरने, मास्क, सेनेटाइजर जैसी सुविधाएं सुलभ करवाई गई। ग्राम पंचायत ने इस दौरान विभिन्न बाध्यताओं के बीच प्रवासियों व ग्रामीणों को पेयजल, राशन, दूध, सब्जी सहित रोजमर्रा की जरूरत के सामान पहुंचाकर राहत दी।
प्रवासियों के सामने गांव में रहकर रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई हैं, ऐसे में ग्राम पंचायत ने नरेगा व संस्थाओं की मदद से ज्यादा से ज्यादा प्रवासियों और स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ना शुरू कर दिया। लोगों के जीवन में इससे बदलाव भी होने लगा है। ग्राम पंचायत के युवा सरपंच संदीप श्रीमाली ने कोरोना संकटकाल से बेराजगार हुए लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों के बारे में बताया कि वे गांव और पंचायत के अन्य इलाकों में संस्थाओं के साथ मिलकर रोजगारपरक विषयों पर प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर ही लोगों को रोजगार मुहैया हो सके इस काम में जुटे हुए हैं।
राजीविका के माध्यम से सेमा ग्राम पंचायत में महिलाओं को स्वरोजगार की गतिविधियों से प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराए जा रहा है। महिलाओं को ऋण दिलाकर उन्हें व्यवसाय के लिए आर्थिक संबल भी दिया जा रहा है। वर्तमान में पशु सखी व कृषि सखी कार्यक्रमों के जरिये खेती-बाड़ी व पशुपालन की योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को ताजा व जैविक सब्जी की पैदावार के लिए छोटे स्तर पर किचन गार्डन, जबकि बड़े स्तर पर खेती के लिए रियायती दर पर खाद, बीज व कीटनाशक उपलब्ध कराया जा रहा है। सेमा क्लस्टर की अन्य पंचायतों में महिलाएं मुर्गीपालन का व्यवसाय कर आत्मनिर्भर बनी हैं। सेमा पंचायत में भी मुर्गीपालन के व्यवसाय से जोड़ने के लिए महिलाओं को प्रेरित किया जा रहा है।

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