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Railmagara
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गिरीश व्यास
रेलमगरा. परिवार के पालन पोषण के लिए घर छोड़कर विभिन्न प्रांतों में रोजगार के लिए पहुंचे मेवाड़ी प्रवासी श्रमिकों एवं कामगारों को कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन से उपजे हालात ने फिर से गांव लौटने को विवश कर दिया है। ऐसे में जहां रोजगार छिन गया, वहीं वायरस के खौफ के चलते इन्हें अपने परिवार की चिंता सताने की लगी, जिससे सिवाय कर्मस्थली छोडऩे के उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। कुछ कई परेशानियों से जूझते घर पहुंचे तो कई श्रमिक डेढ़ माह बाद भी अपने घर नही पहुंच पाए हैं। लॉकडाउन के चलते परिवहन के साधन न होने से इन दिहाड़ी, कामगारों को कई गुना अधिक पैसा देने के बाद भी अपने घर की राह नहीं मिली है। कुछ पहुंचे तो उन्हें सुरक्षा के लिहाज से अभी 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन में रहना पड़ा रहा है। यहां के अधिकतर प्रवासी कामगार आइसक्रीम का व्यवसाय करते हैं। अधिकतर के स्वयं के ठेले हैं तो कुछ वहां श्रमिक हैं। ये ही सीजन है जब आइसक्रीम ज्यादा जलती है। ऐसे में अब उन्हें ये धंधा हाथ से जाता प्रतीत हो रहा है। लॉकडाउन ने इन कामगारों के सपनों पर पानी फेर दिया। आमदनी न होने से घर बैठे खाने का जुगाड़ व घर खर्च चलाना कठिन हो गया है।
रेलमगरा. परिवार के पालन पोषण के लिए घर छोड़कर विभिन्न प्रांतों में रोजगार के लिए पहुंचे मेवाड़ी प्रवासी श्रमिकों एवं कामगारों को कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन से उपजे हालात ने फिर से गांव लौटने को विवश कर दिया है। ऐसे में जहां रोजगार छिन गया, वहीं वायरस के खौफ के चलते इन्हें अपने परिवार की चिंता सताने की लगी, जिससे सिवाय कर्मस्थली छोडऩे के उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। कुछ कई परेशानियों से जूझते घर पहुंचे तो कई श्रमिक डेढ़ माह बाद भी अपने घर नही पहुंच पाए हैं। लॉकडाउन के चलते परिवहन के साधन न होने से इन दिहाड़ी, कामगारों को कई गुना अधिक पैसा देने के बाद भी अपने घर की राह नहीं मिली है। कुछ पहुंचे तो उन्हें सुरक्षा के लिहाज से अभी 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन में रहना पड़ा रहा है। यहां के अधिकतर प्रवासी कामगार आइसक्रीम का व्यवसाय करते हैं। अधिकतर के स्वयं के ठेले हैं तो कुछ वहां श्रमिक हैं। ये ही सीजन है जब आइसक्रीम ज्यादा जलती है। ऐसे में अब उन्हें ये धंधा हाथ से जाता प्रतीत हो रहा है। लॉकडाउन ने इन कामगारों के सपनों पर पानी फेर दिया। आमदनी न होने से घर बैठे खाने का जुगाड़ व घर खर्च चलाना कठिन हो गया है।
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