वो जगह जो कृष्ण की नहीं है || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2019)
प्रसंग:
यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् |
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ||
भावार्थ:
हे पाथे !
अपने-आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान् क्षत्रिय लोग ही पाते है॥
~ श्रीमद्भगवतगीता (अध्याय 2, श्लोक 32)
~ उपर्युक्त श्लोक में श्री कृष्ण किस स्वर्ग की बात कर कर रहे हैं?
~ क्षत्रिय कौन है?
~ क्षत्रिय धर्म असल में क्या है?
~ श्रीकृष्ण अर्जुन को क्षत्रिय धर्म की बात क्यों बताते हैं?
~ श्रीकृष्ण अर्जुन को स्वर्ग का मोह क्यों देते हैं?
संगीत: मिलिंद दाते
~~~~~
Related videos
वो जगह जो कृष्ण की नहीं है || आचार्य प्रशांत, भ...
आचार्य प्रशान्त
वो दिव्य नेत्र क्या हैं जो कृष्ण ने अर्जुन को द...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-27) वो गलती, जो हम करना नहीं चाहते फिर भी...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-27) वो गलती, जो हम करना नहीं चाहते फिर भी...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-23) गीता की वो एक बात, जिसके बाद कुछ बचता...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-38) गीता की सबसे प्रसिद्ध बात, जो हम समझ...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-22) कृष्ण आपके पास कब आते हैं आचार्य प्...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-15) कृष्ण ज़रूरी नहीं हैं, हम तो अपने अनु...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-7) अर्जुन के तल पर उतर रहे कृष्ण || आचार्...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-2) अर्जुन का संघर्ष कृष्ण से || आचार्य प्...
आचार्य प्रशान्त
'गीता सबके लिए नहीं है', ऐसा क्यों कहते हैं कृष...
आचार्य प्रशान्त
(गीता-7) अर्जुन के तल पर उतर रहे कृष्ण || आचार्...
आचार्य प्रशान्त