सच नहीं है, न झूठ ही है || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2017)
शब्दयोग सत्संग
१४ अप्रैल २०१७
अद्वैत बोधस्थल, नॉएडा
अष्टावक्र गीता, अध्याय १८ से
येन विश्वमिदं दृष्टं स नास्तीति करोतु वै ।
निर्वासनः किं कुरुते पश्यन्नपि न पश्यति ॥१५॥
जिसने इस विश्व को कभी यथार्थ देखा हो, वह कहा करे कि नहीं है, नहीं है, जिसे विषय वासना ही नहीं है, वह क्या करे? वह तो देखता हुआ भी नहीं देखता।
प्रसंग:
सच क्या है?
झूठ क्या है?
सच नहीं है, न झूठ ही है अष्टावक्र ऐसा क्यों बता रहें है?
खुद का नेति-नेति कैसे करें?
Related videos
वेदों का ज्ञान नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास ह...
Patrika
चेतना क्या है? चेतना शुद्ध कैसे होती है? || आचा...
आचार्य प्रशान्त
उपनिषद क्या है ? उपनिषद कितने हैं? उपनिषद: आत्म...
Sanatan Vedic Knowledge
वेद, पुराण, उपनिषद भी पढ़ाएगी जीटीयू
Patrika
मुक्त चेतना आत्मा है, और लदी चेतना बंधन || आचार...
आचार्य प्रशान्त
लगे है, तब है ; जब लगे नहीं है, तब भी है || आचा...
आचार्य प्रशान्त
ध्यान से जन्मता है उपनिषद || आचार्य प्रशांत, उप...
आचार्य प्रशान्त
वेदान्त क्या है? अद्वैत क्या है? || आचार्य प्रश...
आचार्य प्रशान्त
वेदान्त क्या है? अद्वैत क्या है? || आचार्य प्रश...
आचार्य प्रशान्त
स्वर्ग क्या है? जीवित रहते स्वर्ग पाने की विधि...
आचार्य प्रशान्त
कांग्रेस की आर्थिक नाकेबंदी: जिलाध्यक्ष बोले- च...
Patrika
कौन है ABVP की पूर्व नेता चेतना पांडे, जो गोरखप...
Jansatta