जितना साफ़ होते जाओगे, उतना ही तुम्हें गंदा करना मुश्किल होगा || आचार्य प्रशान्त (2016)
शब्दयोग सत्संग, २५वाँ अद्वैत बोध शिविर
१६ अक्टूबर २०१६
नैनीताल
प्रसंग:
क्या हमें संसार भ्रष्ट करता है? या खुद?
अपने को सफाई कैसे करें?
हम गंदे चीज के आदी क्यों हो जाते है?
जितना साफ़ होते जाओगे, उतना ही तुम्हें गंदा करना मुश्किल होगा?
हम में बदलाव कैसे आये?
बाँसुरी संगीत: मिलन दाते
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