सीधे चल कर भी वहीं पहुँचोगे, और ठोकरें खा-खा कर भी || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
शब्दयोग सत्संग
१६ जुलाई २०१४
अद्वैत बोधस्थल, नॉएडा
पौढ़ी (जपुजी साहिब) :
सेई तुधुनो गावहि जो तुधु भावनि रते तेरे भगत रसाले ॥
अर्थ: जो तुझे भाते हैं वही तुझे गाते हैं| तेरे भक्त तेरे रस में डूबे रहते हैं |
प्रसंग:
"सीधे चल कर भी वहीं पहुँचोगे, और ठोकरें खा-खा कर भी" इस संदर्भ में गुरु नानक हमें क्या सीखा रहें है?
जो तुझे भाते हैं वही तुझे गाते हैं का क्या अर्थ है?
मन को सीधे चलना क्यों नहीं भाता है?
"तेरे भक्त तेरे रस में डूबे रहते हैं" यहाँ रस कहने से क्या आशय है?
Related videos
Big Issue : ऐसा संभाग मुख्यालय: गिरते-पड़ते......
Patrika
Bollywood Actress को पहचान नहीं पाए लोग, देख कर...
Boldsky
Amitabh Bachchan को देख कर आप भी खा जाएंगे धोखा...
Boldsky
Sherlyn Chopra ने International Yoga Day पर किय...
Filmibeat
Beating Retreat Ceremony: मंत्र-मुग्ध कर देने व...
Asianet News Hindi
International Yoga Day: Indian Jawans के साथ Do...
Oneindia Hindi | वनइंडिया हिन्दी
Yoga में भी मिलावट कर दी Gadkari ने!
Creator Connect
Yoga में भी हिंदू-मुस्लिम कर फंसे Congress Lead...
Amar Ujala
अगर आपको भी लगती है बेहद ठंड, तो एक बार कर लें...
Boldsky
कानपुर देहातः पुत्री की हत्या की रिपोर्ट लिखाने...
Oneindia Hindi | वनइंडिया हिन्दी
Sasural Simar Ka 2 spoiler: दर दर की ठोकरें खा...
Filmibeat
सियासत का शिकार हुआ व्यापार ! RJD fans चाय वाले...
Oneindia Hindi | वनइंडिया हिन्दी